सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही फल देता है— पूज्य श्री बृजनंदन जी महाराज

सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही फल देता है- — पूज्य श्री बृजनंदन जी महाराज

सकती । सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही हमें फल देती है इस धरती में ईश्वर के रूप में माता-पिता पर विश्वास करें, माता-पिता इस धरती में भगवान है  यह तो महादेव के पुत्र  श्री गणेश जी ने भी कहा है इसलिए वह प्रथम पूज्य हुए है । उन्होंने कहा था की धरती में भगवान हमारे माता-पिता है वे ही  ईश्वर है श्री गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर कहा कि यही पूरे बह्मांड की परिक्रमा है ।
                   उक्त बातें देश के प्रसिद्ध कथा वाचक पूज्य श्री बृजनंदन जी महाराज ने कही, इन दोनों शहर  में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन चल रहा है शहर के प्रतिष्ठित वर्मा परिवार द्वारा उक्त धार्मिक आयोजन  विगत 21 फरवरी से 28 फरवरी तक करवाया जा रहा है  आज पूज्य श्री बृजनंदन जी महाराज पत्रकारों से रूबरू हुए ।
              इस अवसर पर उन्होंने आगे कहा की  समाज में हम जितने शिक्षित हो रहे हैं , उतने ही हम अपने  माता-पिता को उपेक्षित कर रहे हैं ,माता- पिता उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। आज बड़ों का सम्मान घट रहा है।  व्यक्ति अध्यात्म की ओर जुड़े सनातनता की ओर जुड़े और व्यक्ति समाज में माता-पिता और गुरु तथा ईश्वर के प्रति आस्था रखें तब अवश्य उसे फल की प्राप्ति होगी।वर्तमान समय में व्यक्ति सुख को खरीद रहा है पर शान्ति गायब हो  रही है , शांति केवल शिव में है शांति केवल भगवान में ही  है। श्री कृष्णा राधा में है  , शांति का गीत है भागवत।  आज हम बहुत सारे संसाधन  इकट्ठा कर रहे हैं। संसाधन तो इकट्ठे हो रहे हैं परंतु हमारे सुख और शांति आज संसार से धीरे-धीरे गायब हो रही है। माइग्रेन डिप्रेशन जैसी बीमारियों से आज लोग ग्रसित हो रहे हैं हम बिस्तर तो खरीद सकते हैं।लेकिन नींद नहीं खरीद सकते, भोजन खरीद सकते हैं ,पर स्वाद नहीं खरीद सकते । विश्वास अध्यात्म ही एकमात्र चिंतन है जो आपको यह सब  प्राप्त करा सकता है । वर्तमान में चल रहे कलयुग के बारे में उन्होंने बताया की अभी कलयुग के 4 लाख 32 हजार वर्ष में अभी साढे पाच हजार वर्ष हुए है । अभी कलयुग में सतयुग का चरण है यह शिवयोग है यह भगवान का युग है हम भाग्यशाली है कि हमारे यहां कथाएं चल रही हैं ईश्वर के प्रति हमारी आस्था बनी हुई है, आज हम मंदिर  तभी जाते हैं जब हमारी आस्था जागती है। हमे हर समय सकारात्मक विचार रखना होगा । डिप्रेशन, माइग्रेन जैसी बीमारियों आदि से बचने के लिए व्यक्ति को नास्तिक होकर भी ईश्वर को मानना होगा  तभी उसे फल की प्राप्ति होगी ।
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