छत्तीसगढ़धार्मिक आयोजनशक्ति

जब भगवान शंकर पहुंचे श्री कृष्ण जी के बाल स्वरूप के दर्शन को —— देवी चित्रलेखा✅️भव्य आकर्षक पंडाल में हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण कर पुण्य के भागी बन रहे..✅️देवी चित्रलेखा के सुंदर भजन श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहयो. तो पे पान चढ़े तो पे फूल चढ़े तो पे चढ़े दूध की धार.. की प्रस्तुति से श्रोतागण ताली की सेवा देकर खूब झूमकर आनंद लिए…✅️ मंच मे गोवर्धन महाराज की सुंदर आकर्षक झांकी की प्रस्तुति .. ✅️ गर्मी से राहत दिलाने तथा शीतल भरा वातावरण का एहसास कराने हेतु पंडाल के अंदर मिस्टिंग मशीन की सुविधा..

जब भगवान शंकर पहुंचे श्री कृष्ण जी के बाल स्वरूप के दर्शन को —— देवी चित्रलेखा✅️भव्य आकर्षक पंडाल में हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण कर पुण्य के भागी बन रहे..✅️देवी चित्रलेखा के सुंदर भजन श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहयो. तो पे पान चढ़े तो पे फूल चढ़े तो पे चढ़े दूध की धार..की प्रस्तुति से श्रोतागण ताली की सेवा देकर खूब झूमकर आनंद लिए…

शक्ति l शहर के प्रतिष्ठित फर्म वंदना ट्रेलर्स एंड
बॉडी मैन्युफैक्चर प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन तिलोकचंद जायसवाल (दादू) एवं नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा जायसवाल तथा सतीश कुमार जायसवाल (अधिवक्ता ) द्वारा इन दोनों शहर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन विगत 4 मई से करवाया जा रहा है , वंदना ट्रेलर्स एंड बॉडी मैन्युफैक्चर प्राइवेट लिमिटेड परिसर में धार्मिक आयोजन सायं 4 से 7 बजे तक चल रहा है। कथा के पांचवें दिन 8 मई बुधवार को भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं एवं गोवर्धन लीला का बहुत ही सुंदर ढंग से देश की प्रसिद्ध कथा वाचिका देवी चित्रलेखा जी के मुखारविंद से हजारों की संख्या में उपस्थित भक्तों ने श्रवण किया , देवी चित्रलेखा ने भगवान की सुंदर लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शंकर श्री कृष्ण जी के बाल स्वरूप का दर्शन करने एक साधु का वेश धारण कर भिक्षा के बहाने श्री कृष्ण के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुँच जाते हैं। भगवान शिव जब ब्राह्मण रूप मैं श्री कृष्ण के दर्शन हेतु गोकुल आते हैं तो मैया यशोदा उनके लिए भिक्षा लाती हैं। भिक्षा में शिव को जब मैया यशोदा हीरे मोती से जड़ित हार देती है तो भगवान शिव लेने से मना कर देते हैं और कहते हैं की मुझे सिर्फ़ भिक्षा के तौर पे  कान्हा के दर्शन कर दो । यशोदा मैया भगवान शिव के स्वरूप को देखकर डर जाती है और मना कर देती हैं और जाने के लिए कहती हैं।  तब पुरणमासी काकी आकर यशोदा को मनाती है और कहती है की एक बार साधु महात्मा को कान्हा के दर्शन करा दो तो वो मान जाती है और कान्हा को  बाहर ले आती हैं। तब भगवान शिव श्री कृष्ण जी के बाल स्वरूप के दर्शन कर  वापस चले जाते हैं। महादेव जब वहाँ से जाते हैं तो अपने चरणों को छाप वहाँ छोड़ जाते हैं जिसे देख यशोदा और नंदबाबा समझ जाते हैं की ये कोई आम ब्राह्मण नहीं थे कोई दिव्य पुरुष थे। बाल रूप में ही भगवान कृष्ण ने पुतना के प्राणों को हर कर मोक्ष प्रदान किया बाल रूप में ही भगवान ने कालिया नाग एवं राक्षसों का वध किया बाल रूप में ही भगवान ने रेवतीरमण में मिट्टी से लोटपोट होकर लीलाएं की , कथा में देवी चित्रलेखा ने आगे गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रजवासियों को जब इंद्रदेव की पूजा की जगह गोवर्धन और गायों की पूजा करने की सलाह दी थी तब इंद्र के प्रकोप से ही बचाने के लिए उन्होंने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठाकर बृजवासियों की रक्षा कि जिसके बाद से यह पूजा की जाती है. देवी चित्रलेखा ने कहां कि भगवान भाव की भूखे होते हैं आप भगवान को अच्छे-अच्छे मिष्ठान पकवान मेवा खिलाए लेकिन उसमें भाव नहीं होगा तो भगवान उसे स्वीकार नहीं करते हैं । देवी चित्रलेखा ने बताया कि भगवान कृष्ण के वैसे बहुत सारे नाम है लेकिन भगवान कृष्ण को दो नाम बहुत ही ज्यादा प्रिय हैं इसमें एक गोविंद दूसरा कन्हैया है । कथा के बीच-बीच में देवी चित्रलेखा जी के अमृतमयी मधुर वाणी से भजनों की प्रस्तुति श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहयो. तो पे पान चढ़े तो पे फूल चढ़े तो पे चढ़े दूध की धार की प्रस्तुति से श्रोतागण ताली की सेवा देकर खूब झूमकर आनंद लिए इस अवसर पर गोवर्धन महाराज की जीवित झांकी का भी भक्तों ने दर्शन किया, चित्रलेखा जी द्वारा संचालित गौ चिकित्सालय में भी श्रद्धालु सहयोग राशि प्रदान कर रहे है जिनका मंच के माध्यम से आभार व्यक्त किया जा रहा है। कथा कार्यक्रम को सफल बनाने में जायसवाल परिवार सहित शहर के सामाजिक कार्यकर्ता भी जुटे हुए हैं, शक्ति शहर में हो रहे बड़े धार्मिक आयोजन को लेकर जहां शहरवासी आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से एवं अन्य जिलों से भी धर्म प्रेमी अपने परिजनों के साथ पहुंच रहे हैं, वहीं आयोजक वंदना ग्रुप द्वारा बैठने की बहुत ही सुंदर व्यवस्था की गई है, पंडाल के अंदर कूलर एसी पंखे के साथ साथ गर्मी से राहत दिलाने तथा शीतल भरा वातावरण का एहसास कराने हेतु पंडाल के अंदर मिस्टिंग मशीन की सुविधा की गई है । जिससे इन दोनों पड रही गर्मी का एहसास नही होता है । कथा स्थल में साहित्य, सुगंधित धूप दीप अगरबत्ती चंदन एवं भगवान के पोशाक के स्टाल भी लगाए गए हैं ,कथा में प्रतिदिन आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया जा रहा है ।

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